Rajasthan Aachar Sanhita Impact 2023 चुनाव आचार संहिता क्या है और इसमें किन-किन चीजों पर पाबंदी लगती है ? जाने सम्पूर्ण जानकारी यहाँ से ।

Rajasthan Aachar Sanhita Impact 2023

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Rajasthan Aachar Sanhita Impact 2023
Rajasthan Aachar Sanhita Impact 2023

इसके साथ में ही विभिन्न वर्ग के लोगों के मध्य विभिन्न प्रकार के सवाल मन में उपज रहे हैं। जैसे आचार संहिता में दिवाली बोनस, एक लाख नई भर्तियों का वर्गीकरण, तीन नए जिला का सीमांकन, शिक्षक ट्रांसफर जैसे तमाम सवालों पर प्रश्न वाचक चिन्ह लगा हुआ है। लेकिन क्या कभी आपने ये सोचा कि आखिर ‘चुनाव आचार संहिता’ (Chunaav Achaar Sanhita) होती क्या है और क्यों चुनाव आयोग इसे चुनावों के वक्त लागू करता है। आइए हम आपको बताते है कि चुनाव आचार संहिता क्या होती हैं।

  • क्या आचार संहिता लगने से बेरोजगारों का नौकरी का इंतजार अधूरा रह जाएगा?
  • ढाई लाख शिक्षकों के तबादले पर लगा बैन नहीं हटेगा?
  • महिलाओं के लिए घोषित फ्री मोबाइल स्कीम अटक जाएगी?
  • नए बनने वाले प्रस्तावित जिलों का क्या होगा?
  • एक लाख नई भर्तियों की घोषणा
  • सरकारी कार्मिकों को दिवाली बोनस

Rajasthan Aachar Sanhita Impact 2023

चुनाव के दौरान किसी भी अप्रिय घटना को रोकने और शांतिपूर्ण ढंग से चुनाव कराने के उद्देश्य से चुनाव आयोग आचार संहिता लागू करता है। चुनाव खत्म होने तक हर पार्टी और उम्मीदवार को इन निर्देशों का पालन करना होगा. अगर कोई नेता या पार्टी इन नियमों का पालन नहीं करता है तो चुनाव आयोग के पास उसके खिलाफ कार्रवाई करने का अधिकार है. इतना ही नहीं उस उम्मीदवार का टिकट रद्द किया जा सकता है और उसके खिलाफ एफआईआर भी दर्ज करायी जा सकती है.

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अगर किसी राज्य में चुनाव होने वाले हैं तो चुनाव आयोग राज्य में चुनाव की तारीखों की घोषणा के साथ ही आचार संहिता भी लागू कर देता है. इसके लागू होते ही राज्य सरकार और प्रशासन पर कई तरह की पाबंदियां लग जाती हैं. यानी चुनाव ख़त्म होने तक राज्य के सरकारी कर्मचारी चुनाव आयोग के कर्मचारी बन जाते हैं और उसके दिशानिर्देशों पर काम करना शुरू कर देते हैं.

आदर्श आचार संहिता क्या है?

देश में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए चुनाव आयोग कुछ नियम बनाता है। चुनाव आयोग के इन नियमों को आचार संहिता कहा जाता है. लोकसभा/विधानसभा चुनाव के दौरान इन नियमों का पालन करना सरकार, नेताओं और राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी है। चुनाव की तारीख की घोषणा के साथ ही आचार संहिता लागू हो जाती है. देश में लोकसभा चुनाव हर पांच साल में होते हैं।

अलग-अलग राज्यों के विधानसभा चुनाव अलग-अलग समय पर होते हैं. चुनाव आयोग द्वारा चुनाव कार्यक्रमों की घोषणा करते ही आचार संहिता लागू हो जाती है। चुनाव प्रक्रिया पूरी होने तक आचार संहिता लागू रहती है. चुनाव की तारीख की घोषणा होते ही देश में आचार संहिता लागू हो जाती है और वोटों की गिनती तक जारी रहती है।

आचार संहिता के मुख्य नियम क्या हैं?

  • आचार संहिता लागू होने के बाद मुख्यमंत्री या कोई भी मंत्री किसी भी कार्य का उद्घाटन, शिलान्यास या लोकार्पण नहीं कर सकता.
  • मुख्यमंत्री के अलावा सरकार का कोई भी मंत्री, सांसद या विधायक सरकारी विमान या हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल नहीं कर सकता.
  • मुख्यमंत्री या मंत्री राज्य अतिथि गृह, सर्किट हाउस, राजस्थान हाउस, जोधपुर हाउस-बीकानेर हाउस (दिल्ली) और राज्य अतिथि गृह (दिल्ली और मुंबई में राजस्थान के राज्य अतिथि गृह सहित) आदि में नहीं रुक सकते।
  • मुख्यमंत्री या मंत्री किसी भी राजनीतिक बैठक, सम्मेलन, कार्यक्रम आदि में सरकारी वाहन से नहीं जा सकते।
  • मुख्यमंत्री या मंत्री सरकारी विभागों, अधिकारियों, पुलिस आदि की नियमित बैठकों के अलावा अन्य बैठकें नहीं ले सकते। उनसे कोई नया आदेश लागू करने के लिए नहीं कह सकते।
  • सरकार के लिए कोई नया कार्यक्रम शुरू करना, नई योजना की घोषणा करना, नई भर्ती शुरू करना, नया बजट आवंटित करना, नई नीति लागू करना, सरकारी कर्मियों की ट्रांसफर-पोस्टिंग करना आदि संभव नहीं है।
  • सरकार को प्रक्रियाधीन योजनाओं, सेवा वितरण, भर्ती परिणाम जारी करने या परिणाम के बाद नियुक्तियां करने के लिए भी चुनाव आयोग की अनुमति लेनी होगी।
  • किसी आपदा, बाढ़ या भूकंप की स्थिति में भी सरकार जनहित में जो भी आवश्यक समझे वह कर सकती है, लेकिन इसके लिए भी चुनाव आयोग से अनुमति लेनी होगी।
  • दिवाली पर सरकारी कर्मचारियों के लिए बोनस और महंगाई भत्ता लागू करना होगा, लेकिन इसके लिए चुनाव आयोग से इजाजत लेनी होगी.
  • सार्वजनिक धन का उपयोग किसी विशेष राजनीतिक दल या नेता को लाभ पहुंचाने वाले कार्य के लिए नहीं किया जाएगा।
  • किसी भी राजनीतिक दल, उम्मीदवार, नेता या समर्थकों को रैली करने से पहले पुलिस से इजाजत लेनी होगी.
  • किसी भी चुनावी रैली में धर्म या जाति के नाम पर वोट नहीं मांगा जायेगा.

क्या आचार संहिता लगने से बेरोजगारों का नौकरी का इंतजार अधूरा रह जाएगा?

फिलहाल 48 हजार पदों पर तृतीय श्रेणी शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रियाधीन है । चिकित्सा विभाग में 20 हजार पदों पर भर्ती प्रक्रिया चल रही है। करीब एक लाख पदों पर भर्ती प्रक्रिया चल रही है, जिसमें 6000 स्कूल व्याख्याताओं और 5500 ग्रेड सेकंड शिक्षकों की भर्ती शामिल है ।

अगर आचार संहिता लागू होने से पहले नियुक्तियां नहीं हुईं तो गेंद सरकार के पाले से निकलकर चुनाव आयोग के पाले में चली जाएगी । उसके बाद फैसला चुनाव आयोग ही लेगा । आचार संहिता से पहले प्रक्रियाधीन भर्तियों में नियुक्तियां दी जा सकती हैं.

अटक जाएगी फ्री मोबाइल स्कीम?

वैसे तो राज्य सरकार ने 10 अगस्त से महिलाओं को मुफ्त मोबाइल फोन का वितरण कर रही है । जिसमे पहले चरण मे 40 लाख महिलाओं को ही मोबाइल फोन दे रही है जबकि सरकार को एक करोड़ 40 लाख महिलाओं को मोबाइल फोन देने हैं।

अगर सभी एक करोड़ 40 लाख महिलाओं को आचार संहिता लगने से पहले फोन नहीं दिए गए तो फिर सरकार को मोबाइल बांटने के लिए चुनाव आयोग की इजाजत लेनी पड़ेगी। अगस्त से अक्टूबर के बीच पहले चरण के सभी 40 लाख मोबाइल महिलाओं को वितरण किए जा रहे । लेकिन बाकी बची 1 करोड़ महिलाओ को फ्री मोबाईल का वितरण नहीं किया गया । न ही अभी तक इंदिरा गांधी गारंटी कार्ड का वितरण शुरू किया । ऐसे मे यह स्कीम चुनाव आयोग के पाले मे जा सकती है ।

ढाई लाख शिक्षकों के तबादले पर लगा बैन नहीं हटेगा?

पिछले साढ़े चार वर्ष में सबसे ज्यादा तृतीय श्रेणी के साथ में अन्याय हुआ है क्योंकि शिक्षा मंत्री व स्वयम मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के द्वारा तृतीय श्रेणी शिक्षकों को बार-बार ट्रांसफर पॉलिसी बनाने की बात पर ट्रांसफर स्थगित किए है। लेकिन अभी तक इन शिक्षकों के ट्रांसफर नहीं हुए हैं। गोविंद सिंह डोटासरा के शिक्षा मंत्री रहते हुए एक बार ऑनलाइन आवेदन भी आमंत्रित किए थे। जिसमें लगभग 85000 तृतीय श्रेणी शिक्षकों ने ट्रांसफर के लिए अप्लाई किया था। लेकिन उसके बाद से ही सरकार के द्वारा ट्रांसफर पॉलिसी का राग अलापा गया है।

अभी तक ट्रांसफर ना होने के कारण तृतीय श्रेणी शिक्षक काफी असंतुष्ट हैं। तृतीय श्रेणी शिक्षकों ने धरातल पर उतरकर कई बार जयपुर धरना प्रदर्शन भी किए हैं। लेकिन हर बार उन्हें स्थानांतरण धरना प्रदर्शन झूठे आश्वासन देकर खत्म करवाया गया है ।

1 लाख भर्तियों की घोषणा पर क्या प्रभाव होगा

इसी साल फरवरी में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बजट जवाब के दौरान यह घोषणा की थी, जो अब पूरी होती नजर नहीं आ रही है. क्योंकि सरकार के किसी भी विभाग ने अभी तक एक भी पद तय नहीं किया है जिस पर भर्ती की जानी है.

सरकार ने अभी तक भर्ती एजेंसियों राजस्थान लोक सेवा आयोग (आरपीएससी-अजमेर) और कर्मचारी चयन बोर्ड (जयपुर) को किसी भी नए पद पर भर्ती के लिए आवेदन नहीं भेजे हैं. कार्मिक विभाग ने सभी विभागों से एक लाख पदों के बारे में दो बार विस्तृत जानकारी मांगी है, लेकिन अभी तक विभागों से यह जानकारी नहीं मिल सकी है। आचार संहिता के लागू होते ही 1 लाख पदों पर नई भर्तियों की प्रक्रिया अटक जाएगी ।

Diwali bonus / दीपावली पर सरकारी कर्मचारियों का बोनस

राज्य सरकार दिवाली पर राज्य कार्मिकों को दिवाली बोनस / Diwali bonus प्रदान करती है आचार संहिता के कारण अटक सकता है क्योंकि पिछली बार की तरह ही इस बार भी चुनाव नवंबर दिसंबर माह में होने हैं। इस बार दीपावली 12 नवंबर को है। उससे पूर्व में ही आचार संहिता लग जाएगी राज्य सरकार को करीब साढे तीन लाख कर्मचारियों के लिए बोनस की घोषणा करनी है। आचार संहिता के लगने के बाद यदि सरकार बोनस की घोषणा करती है तो उसे आयोग के निर्णय का इंतजार करना होगा या उसका परमिशन लेना होगा।

विगत 2018 में राज्य सरकार को आचार संहिता में कर्मचारियों की बोनस की फाइल निर्वाचन विभाग के पास में भेजनी पड़ी थी निर्वाचन विभाग के द्वारा बोनस की फाइल को अप्रूवल देने के बाद राज्य कर्मचारियों को दिवाली बोनस दिया गया था राजस्थान राज्य के कर्मचारी सरकार से मांग कर रहे हैं कि आचार संहिता लगने से पहले ही दिवाली बोनस की घोषणा करनी चाहिए जिससे अनावश्यक रूप से आयोग के नियम प्रावधानों में बोनस प्रकरण में न फंसे और राज्य कर्मचारियों को दिवाली का बोनस सही समय पर प्राप्त हो सके

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